नगर निगम में चल रहा निरंतर करोड़ों का घोटाला
नेशन एक्सप्रेस इंडिया संवाद,
मुरादाबाद। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अधिकारियों को दो टुक हम सूची बनवा रहें हैं भ्रष्ट अधिकारियों कर्मचारियों पर करें अपने स्तर से कार्यवाही नहीं तो एक साथ 150 को करुंगा निलंबित मुख्यमंत्री की यह बात मुरादाबाद नगर आयुक्त और महापौर दोनों को भी ध्यान रखनी चाहिए जो अपने कार्यों की अपने आप प्रशंसा करते नहीं थकते कभी स्मार्ट सिटी कभी संविधान पार्क कभी हनुमान वाटिका कभी 3 डी स्क्रीन के नाम पर स्क्रीन की बात करें तो कंपनी बाग पार्क में नगर निगम के द्वारा पर्दा लगवाया गया और महानगर की भोली-भाली जनता को मेसेज दिया गया था कि प्रोजेक्टर पर्दे पर सुंदर दृश्य दिखाई देंगे परन्तु जनता का कहना है कि एक महीने तो क्या एक हफ्ते भी कुछ नहीं दिखाई दिया और पर्दा पहले धूल में अटता रहा और बाद में बीते दिनों आई तेज आंधी की भेंट चढ़ गया। अब बताइए इसे अपने को लाभ पहुंचाने के लिए घोटाला नहीं तो और क्या कहेंगे। जो शायद ये दोनों निरंतर करके सरकार को करोड़ो रुपए का चूना लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। सबसे बड़ा मामला है निर्माण विभाग अंतर्गत ई टैंडरों से जुड़ा हुआ आपको बता दें कि जहां पूर्व में निर्माण कार्य कराने के लिए टैंडर तीस तीस प्रतिशत तक ब्लो जाते थे।
क्या है ब्लो समझें
यदि कोई 8 लाख रुपए की कीमत का टैंडर है और उस पर 30 प्रतिशत ब्लो डाला गया तो वह जिस ठेकेदार ने आन लाइन बोली लगाई उसके लिए घटकर 5 लाख 60 हजार का रह जायेगा और उस पर सरकार को 2 लाख 40 हजार का फायदा होगा इस तरह यदि निर्माण कार्यों के लिए 50 करोड़ का बजट सेंशन होगा तो सरकार को 30 प्रतिशत ब्लो के हिसाब से 15 करोड़ का फायदा होता था जो वर्तमान में नगर आयुक्त और महापौर दोनों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। (उदाहरण) आज यदि कोई 8 लाख का टैंडर है तो वह 7 लाख 90 हजार 7 लाख 95 हजार इस तरह से डलवाकर मंजूर किए जा रहे हैं। अब आज की स्थिति में यदि निर्माण कार्य के लिए 50 करोड़ का बजट सेंशन होगा तो उस बजट पर सरकार को लगभग 12 करोड़ का नुकसान हो रहा है और ये 12 करोड़ कहां जा रहा है आप समझ सकते हैं। नाम न खोलने की शर्त पर कुछ ठेकेदारों ने जानकारी दी कि नगर आयुक्त ने बाहर और लोकल के कुछ ठेकेदारों को मिलाकर एक ग्रुप बना रखा है जो टैंडर मेनेज कराकर बांटने का काम करता है और लोकल के कुछ ठेकेदारों का ग्रुप टैंडर मेनेज कराने के लिए ठेकेदारों से नगर आयुक्त और महापौर के नाम पर अतिरिक्त चार्ज वसूली करता है। जानकारी मिली है कि नगर निगम के अंदर लगभग 250 ठेकेदार हैं परंतु जिससे कि खेल न खुल जाए इसलिए टैंडर मेनेज प्रक्रिया के अंतर्गत मात्र 50 – 60 ही ठेके को काम मिलते हैं।
कैसे होते हैं टैंडर मेनेज
जिन ठेकेदारों को काम देने होते हैं उन्हें कौन कौन सा टैंडर देना है ये पहले ही तय हो जाता है। फिर उन्हें उनके काम बताकर तीन तीन के सेट डलवा दिए जाते हैं क्योंकि शासनादेश है कि यदि टैंडर तीन से कम ठेकेदार डालेंगे तो खोला नहीं जायेगा।
क्या है सेट
आइए सेट समझते हैं। हर तीन ठेकेदारों पर एक ग्रुप बना दिया एक ने 50 पैसे ब्लो डाला दिया दूसरे ने 60 पैसे ब्लो डाला दिया तीसरे ने 70 पैसे ब्लो डाला दिया इस तरह ज्यादा ब्लो 70 पैसे वाले का हुआ तो टैंडर 70 पैसे ब्लो वाले का मंजूर हो गया और शासनादेश भी यही कहता है कि जिसका ज्यादा ब्लो होगा उसका ही टैंडर मंजूर होगा। परंतु यहां फर्क यह है कि कहां .-50,.-60,.-70 पैसे ब्लो और कहां पूर्व का 30 प्रतिशत भी न माने 20 प्रतिशत ही ब्लो मान लें तब भी सरकार को बड़ी बचत होती थी जो आगे विकास कार्यों में काम आ जाती थी और इस तरह 50 करोड़ के बजट में लगभग 60 करोड़ के विकास कार्य हो जाते थे। जानकारी यह भी मिली है कि नगर आयुक्त ने अपनी तरफ से दो अनावश्यक शर्तें भी लगा रखी हैं जबकि ऐसा कोई शासनादेश नहीं है।
ये हैं अनावश्यक शर्तें
शर्त नं 1 की बात करें तो भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एनएबीएल लैब टाइल्स, ब्रिक टेस्टिंग प्रमाण पत्र की तो आपको बता दें कि ये टेस्टिंग प्रमाण पत्र सभी ठेकेदारों को वो एक ही फर्म जारी कर रही है जो निर्माण कार्य की सामग्री टेस्ट करने के लिए अधिकृत भी नहीं है फिर भी उसी का प्रमाण पत्र नगर निगम स्वीकार कर रहा है। शर्त नं 2 ईपीएफ में रजिस्ट्रेशन जो कि टैंडर का लाभ ले रहे उन 50 – 60 ठेकेदारों में से 5 ठेकेदार भी पूरी नहीं कर रहे हैं फिर भी उनके टैंडर मंजूर हो रहे हैं और अन्य ठेकेदार यदि सरकार को फायदा पहुंचाने की नियत से मात्र 10 प्रतिशत भी ब्लो डाल देता है तो उसका टैंडर स्वत: ही निरस्त हो जाता है क्योंकि अन्य ठेकेदार उस मेनेज प्रक्रिया में शामिल नहीं हैं ये है सरकार को लाभ और हानि पहुंचाने का अंतर जो नगर निगम में बादस्तूर जारी है। जानकारी यह भी मिली है कि प्रमाण पत्र लगवाया जा रहा है एन एबीएल लैब का और सड़क व नाला नालियों आदि में लोकल में निर्मित होने वाली जनरल केटेगरी की टाइल्स और ब्रिक इस्तेमाल कराकर वास्तविक टेस्टिंग मुरादाबाद लोक निर्माण विभाग से कराई जा रही है। जबकि टेस्टिंग भी एन एबीएल लैब से ही होनी चाहिए और टाइल्स व ब्रिक भी एन एबीएल केटेगरी की लगनी चाहिए जो कि ऐसा नहीं हो रहा है। इसलिए एनएबीएल लैब के प्रमाण पत्र का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। फिलहाल तो नगर निगम ने टैंडर मेनेज प्रक्रिया जारी रखते हुए हाल ही में 30-5-2026 को लगभग 250 टैंडर आमंत्रित करके मेनेज करा लिए हैं। अब देखते हैं ये खुलासा होने के बाद इस पर रोक लगेगी या सरकार से सैलरी लेने वाले अधिकारी ऐसे ही सरकार की पीठ में भ्रष्टाचारी खंजर घोंपते रहेंगे।
क्या कहते हैं महापौर
महापौर से पूछने पर उन्होंने कहा कि कार्य की गुणवत्ता भी देखनी है इसलिए ज्यादा ब्लो नहीं डलवा सकते।
हालांकि कि महापौर के इस बयान से नेशन एक्सप्रेस इंडिया सरोकार नहीं रखता क्योंकि दस साल से वो ही मेयर हैं तो क्या इतने वर्षों से सरकार की छवि धूमिल कराई जा रही थी। जानबूझकर गुणवत्ता खराब कराई जा रही थी जानबूझकर एस्टीमेट तिगनी कीमत के बनवाए जा रहे थे।

