नेशन एक्सप्रेस इंडिया संवाद,
मुरादाबाद। नगरीय क्षेत्र के स्कूलों में मिड डे मील की व्यवस्था और एनजीओ से कार्य जारी रखे जाने के मास्टर माइंड और पिछले 15 वर्षों से जमे हुए जिला समन्वयक अखिलेश सागर पर अभी तक कोई कार्यवाही का नहीं होना बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्य शैली पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। विभागीय जानकारी के अनुसार विगत दिसंबर माह में तत्कालीन जिलाधिकारी अनुज कुमार सिंह ने शहरी क्षेत्र में मिड डे मील की खराब व्यवस्था को देखते हुए स्कूलों में ही बच्चों के लिए मिड डे मील तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पूर्व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विमलेश कुमार और उसके खास राजदार डीसी मिड डे मील अखिलेश सागर के द्वारा मामले में कोई रुचि नहीं लेते हुए इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। परन्तु जब जिलाधिकारी के द्वारा इस पर अमल करने की बात आई तो दोनों व्यवस्था नहीं होने का हवाला देकर टालते रहे। जब समाचार पत्रों में मिड डे मील को लेकर खबरें छपी तो कमिश्नर मुरादाबाद के द्वारा इसका संज्ञान लेते हुए डीसी मिड डे मील को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था। मगर डीसी के कोई जवाब नहीं देने पर कमिश्नर के द्वारा तीन नोटिस भेजे गए। परन्तु बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लचर कार्यप्रणाली के चलते अभी तक कोई कार्यवाही अखिलेश सागर पर नहीं हो पाई है। सूत्र बताते हैं कि जांच होने पर मिलेगी आय से अधिक संपत्ति। 15 सालों से संविदा पर ही जमा हुआ है डीसी मिड डे मील।

