वर्षों से मुरादाबाद में ही जमें हुए हैं बाबू
नेशन एक्सप्रेस इंडिया संवाद,
मुरादाबाद। योगी राज जीरो टॉलरेंस की निति और इतनी सख्ती के बाबजूद भी अधिकारी व कर्मचारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। चाहें बात भ्रष्टाचार की हो या पद के दुरुपयोग की कोई पीछे नहीं रहना चाहता है। ताजा मामला मुख्य विकास अधिकारी मुरादाबाद के कार्यालय से सामने आ रहा है। सीडीओ ऑफिस में बरसों से जमे और अपनी मजबूत पकड़ के लिए पहचाने जाने वाले स्टेनो गोविंद सिंह के द्वारा बेसिक शिक्षा विभाग से आने वाली फाइलों पर अनुमति करवाते करवाते अपने पुत्र को समग्र शिक्षा अभियान में जिला समन्वयक के पद पर तैनात करवा दिया है। पिछले दिनों बिजनौर निवासी एक शख्स के शिकायत करने पर मामला सामने आने के बाद अब चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग जिला समन्वयक की नियुक्ति प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करने लगे हैं। इस मामले में सबसे मजेदार बात तो यह है कि जिला समन्वयकों की चयन समिति की अध्यक्ष खुद सीडीओ के रहते हुए इस सारे खेल को अंजाम दिया गया और स्टेनो गोविंद सिंह ने पुत्र मोह के चलते सीडीओ की इमेज और प्रतिष्ठा का ख्याल रखे बिना ही पूरी चयन प्रक्रिया को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

बताते चलें कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के सभी जनपदों में आउट सोर्सिंग के माध्यम से संविदा पर जिला समन्वयकों की तैनाती की जाती है। इसमें प्रशिक्षण, बालिका शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता के साथ ही ईएमआईएस आदि के पद शामिल हैं। नियमानुसार प्रत्येक पद हेतु ऑनलाइन आवेदन पत्र लेते हुए रेंडमली आवेदकों को बुलाकर इंटरव्यू किया जाना होता है।
सूत्रों के अनुसार दिसंबर 2025 में शुरू हुई चयन प्रक्रिया में जनपद मुरादाबाद में शुरू से ही सेटिंग का खेल शुरू हो गया था। और सीडीओ ऑफिस के स्टेनो गोविंद सिंह ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विमलेश कुमार की जांचों को दबाने के नाम पर सांठगांठ करके अपने पुत्र के लिए समन्वयक पद आरक्षित कर लिया था। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का अतिक्रमण कर रेंडमली आवेदकों को इंटरव्यू में नहीं बुलाकर सभी को बुला लिया गया और कई सौ लोगों में से जिला समन्वयक बालिका के पद पर स्टेनो गोविंद सिंह के बेटे का चयन कर लिया गया। जो अपने आप में एक अनूठा मामला होने के साथ ही सीडीओ मुरादाबाद तथा चयन समिति की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि जिला समन्वयक पद के लिए कई महिला आवेदकों ने भी आवेदन किया था। परन्तु बालिका शिक्षा सहित किसी भी पद पर किसी भी महिला का चयन नहीं किया गया और न ही उनको वरीयता दी गई।
अब मामला खुलने के बाद से बेसिक शिक्षा विभाग के साथ ही जिला प्रशासन में भी खलबली मची हुई है और अधिकारी मामले को दबाने में जुटे हैं। अब देखते हैं मामला दबता है या कोई कार्यवाही होती है।
