अभिषेक गौड़,
नेशन एक्सप्रेस इंडिया,
मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश में पूर्ण रूप से लागू नहीं हुआ निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 जिसे RTE Act भी कहते हैं। मात्र प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को प्रवेश कराने तक ही सीमित होकर रह गए हैं अधिनियम के प्रावधान। जबकि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड सहित देश के अन्य राज्यों में शत प्रतिशत ढंग से लागू है आर टी ई एक्ट।
RTE Act के अनुसार DIOS और BSA के पद समाप्त हो चुके हैं। अब जिला स्तर पर सिर्फ़ एक पद जिला शिक्षा अधिकारी का सृजित है, जो कि DIOS Rank का होता है। उसके ठीक नीचे उप जिला शिक्षा अधिकारी का पद है जो कि BSA स्तर का होता है।
उत्तर प्रदेश के अलावा देश के अन्य लगभग सभी राज्यों में RTE Act के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा ही कार्य किए जा रहे हैं और वही पद मान्य किया गया है।
परंतु उत्तर प्रदेश के जिम्मेदार अधिकारियों ने RTE Act के इस प्रावधान को अपनी सुविधा के अनुसार लागू ही नहीं किया है, जो कि विधि सम्मत नहीं है और RTE Act के विरुद्ध भी। इसके अलावा आर टी ई एक्ट में शिक्षकों से गैर शैक्षिक कार्य लेने तथा मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए भी कई प्रावधान किए गए हैं। जो कि आज तक लागू होते नहीं दिख रहे हैं। इस प्रकार 15 वर्ष के बाद भी आज तक उत्तर प्रदेश इसे पूर्ण रूप से लागू नहीं कर पाया है।
