नेशन एक्सप्रेस इंडिया,
मुरादाबाद। आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा एम आई टी इंस्टीट्यूट परिसर रामगंज विहार में सोमनाथ मूल ज्योतिर्लिंग का भक्तों द्वारा पूजन एवं दर्शन किया गया। बताया जाता है कि ये ज्योतिर्लिंग उस प्राचीन मूल ज्योतिर्लिंग का भाग है जो 1024 ईस्वी में आक्रमणकारियों द्वारा खंडित कर दिया गया था। खंडित शिवलिंग के कुछ अंश अग्निहोत्री ब्राह्मणों द्वारा सुदूर दक्षिण भारत ले जाए गए। इन अंशों को पुनः शिवलिंग का स्वरूप देकर पीढ़ी दर पीढ़ी उनकी पूजा अर्चना की जाती रही। वर्ष 1924 में अग्निहोत्री पंडितों ने कांची के शंकराचार्य जी से मार्गदर्शन प्राप्त किया। शंकराचार्य जी ने निर्देश दिया कि उचित समय आने तक इनकी पूजा जारी रखें और भविष्य में दक्षिण भारत में शंकर नाम के संत को ये शिवलिंग सौंप दें। इसी क्रम में 15 जनवरी 2025 को सीताराम शास्त्री द्वारा बैंगलुरू स्थित आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम में श्री श्री रवि शंकर को मूल सोमनाथ ज्योर्तिलिंग प्रदान किया गया। उन्हीं के निर्देशानुसार इन पावन शिवलिंग को समस्त भारत के प्रमुख नगरों में दर्शन और पूजन के लिए ले जाया जा रहा है।
इसी क्रम में ज्योतिर्लिंग मुरादाबाद आगमन स्वामी भाव्यतेज द्वारा किया गया। ज्योतिर्लिंग का पूजन वैदिक विधि विधान से किया गया तत्पश्चात सभी भक्तों को दर्शन करवाया गया। वहीं गायक अंकित चित्करा द्वारा मनमोहक भजनों की प्रस्तुति की गई। भजन सुनकर व सोमनाथ जी के दर्शन पाकर भक्त विभोर हो गये। इस कार्यक्रम में महानगर के गणमान्य व्यक्तियों प्रमुख साधू संतों, समाज सेवियों, डाक्टरर्स, इंजीनियर, आर्किटेक्ट, सीए एक्सपोर्टर एवं विभिन्न संस्थाओं संगठनों ने भाग लिया। आर्ट ऑफ लिविंग के जिला समन्वयक एवं प्रशिक्षक पुनीत वर्मन ने बताया कि वैसे तो आर्ट ऑफ लिविंग मुरादाबाद समय समय पर धार्मिक अनुष्ठान करता रहता है परन्तु ये एक ऐतिहासिक क्षण हैं जब श्री सोमनाथ स्वयं मुरादाबाद पधारे हैं। इन ज्योतिर्लिंगों की स्थापना श्री सोमनाथ मंदिर में होने के पश्चात वहीं जाकर दर्शन लाभ हो सकतें हैं।


वैदिक धर्म संस्थान के जिला समन्वयक अविनव सिंह ने बताया सोमनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योर्तिलिंगों में सबसे पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण ज्योर्तिलिंग माना जाता है। इसे आदि ज्योर्तिलिंग भी कहा जाता है यहाँ भगवान शिव स्वयं प्रकाश (ज्योति) के रूप में विराजमान माने जाते हैं। उन्होंने बताया कि एक पौराणिक कथा के अनुसार चंद्र देव सोम को उनके ससुर दक्ष प्रजापति ने शाप दिया था जिससे उनका तेज कम होने लगा इस शाप से मुक्ति पाने के लिए चंद्र देव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की भगवान शिव ने प्रशन होकर उन्हें शाप से आंशिक मुक्ति दी और इसी स्थान पर ज्योर्तिलिंग के रूप में प्रकट हुए। इसी कारण इस स्थान का नाम सोमनाथ पडा़ इसकी भोगोलिक विशेषता ये है कि यह मंदिर अरब सागर के तट पर स्थित है और मंदिर के सामने बाण स्तंभ नामक स्तंभ है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इस दिशा में दक्षिण तक कोई भूमि नहीं है। पूजन और दर्शन के पश्चात भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।

इस अवसर पर आर्ट ऑफ लिविंग स्टेट टीचर कोआरडिनेटर रोहित अग्रवाल, सुखवीर सिंह, शीतू छाबड़ा, डा. गोपाल कृष्ण शर्मा, विभा अरोड़ा, सीए अभिनव, लिप्त अग्रवाल, अलका अग्रवाल, माणिक अग्रवाल, रचना बिष्ट, अर्द्धमोनी दीरशांत दास, डा. विशेष गुप्ता,के के गुप्ता, रीता अग्रवाल, ऋषि यादव सहित एम आई टी कालेज के टरस्टी अरविंद गोयल, वाई पी गुप्ता आर्दश अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, सुधीर गुप्ता, नीरज अग्रवाल, दीवान संस से सुरेन्द्र गांधी, डिजाईनको से विनय लोहिया उपस्थित रहे।
