नेशन एक्सप्रेस इंडिया,
मुरादाबाद । धीमरी गांव में मेयर विनोद अग्रवाल व सरकारी जमीन के दावे को लेकर चल रहे विवाद का कोई हल नहीं निकल पाया है। जिलाधिकारी अनुज सिंह स्वयं दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीएम सदर डा. राममोहन मीणा, एसडीएम बिलारी विनय सिंह, तहसील प्रशासन और चकबंदी की टीमें पैमाइश में जुटीं। मेयर के सामने ही पैमाइश शुरू हुई। पूरे दिन टीमें पैमाइश में जुटी रहीं। शाम हो गई। मगर, मामला सरकारी जमीन व महापौर के दावे की जमीन के बीच उलझा ही रहा।
धीमरी के साथ टीम उससे सटे वीरपुर और सब्जीपुर गांव के गाटा संख्या की भी साथ-साथ पैमाइश कर रही है जिससे असल स्थिति सामने आ सके। ऐसे में प्रकरण का हल निकलने में कई दिन का वक्त लगने का आशंका है। मेयर का कहना है कि टीम पैमाइश कर रही है। पूरी होने के बाद ही अब कुछ कहूंगा।
उक्त भूमि पर कक्षा एक से 12वीं तक कंपोजिट विद्यालय का निर्माण होना है जिसके लिए जिला प्रशासन की ओर से बरेली-मुरादाबाद हाईवे स्थित पुराने टोल के पास धीमरी गांव में सरकारी जमीन चिह्नित की गई है। जमीन की नापजोख को लेकर वृहस्पत को सदर तहसील प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। सरकारी जमीन चिह्नांकन के दौरान आ रही बाउंड्रीवाल को प्रशासन की टीम ने बुलडोजर से गिरा दिया। गिराई गई बाउंड्रीवाल पर मेयर विनोद अग्रवाल ने अपना दावा किया। संबंधित जमीन खुद की बताते हुए विरोध जताया। जिससे हंगामा खड़ा हो गया।

मेयर के विरोध पर टीम वापस हो गई। इसके बाद उन्होंने डीएम व कमिश्नर से शिकायत की। जिस पर जिलाधिकारी अनुज सिंह ने स्वयं मौके पर जाकर पैमाइश कराने की बात कही। हुआ भी यही जिलाधिकारी शुक्रवार को टीम संग सुबह ही पहुंच गए। मेयर भी पहुंचे। व प्रशासन की टीम ने पैमाइश शुरू की। मेयर ने कहा कि जिसे सरकारी भूमि मानकर बाउंड्रीवाल गिराई गई है। वह मेरी है। उसका दाखिल-खारिज भी मेरे पास है। टीम को उन्होंने बताया कि उनकी भूमि गाटा संख्या 1086 में है। गाटा संख्या 1086 में वह, अंजू रस्तोगी व भाजपा नेता रिषिपाल सिंह चौधरी के छोटे भाई व निर्यातक अमित चौधरी कास्तकार हैं। अंजू रस्तोगी ने हाल में ही अपने हिस्से की जमीन बेची है। मेयर ने बताया कि दस साल पहले उन्होंने चांद बाबू से यह भूमि खरीदी थी। बताया कि इस गाटे में शेष 0.2430 मीटर जमीन सरकारी है जिस पर एमडीए की ओर से सड़क बनाई गई है। एनओसी भी जारी हो चुकी है। इससे सटे गाटा संख्या 1087 में सरकारी भूमि है। गाटा संख्या 1086 में सरकारी भूमि का कोई औचित्य नहीं है। डीएम ने महापौर को आश्वाशन दिया कि निष्पक्ष पैमाइश ही होगी। इसके बाद मेयर विनोद अग्रवाल वहाँ से निकल आए। चूंकि, पैमाइश में धीमरी के साथ उससे जुड़े वीरपुर व सब्जीपुर गांव के संबंधित गाटा संख्या की साथ-साथ पैमाइश हो रही है। ऐसे में मेयर की समस्या का समाधान होने में अभी समय लगेगा। हालांकि इस मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहें हैं कि जब अभी दूर दूर तक कोई वसीगत नहीं है तो सरकारी धन का दुरूपयोग कर सड़क मेयर द्वारा अपनी बताई गई जमीन की कीमत बढ़वाने के लिए बना दी गई। जहाँ एक ओर लाइन पार एक ऐसी आबादी वाला क्षेत्र है जहाँ से भाजपा के मेयर और विधायक जीतते चले आ रहें हैं वो क्षेत्र सड़कें नालियाँ बनवाने के लिए आंख उठाकर देख रहा है। परंतु वहाँ नगर निगम द्वारा बजट न होने की बात कह कर विकास नहीं कराया जाता और यहाँ अकेले मेयर के लिए बेहतरीन सड़क डाल दी गई है। सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि मेयर द्वारा आरोप लगया गया है कि ये सारा खेल एसडीएम सदर ने लेखपाल राकेश चौहान को अतिरिक्त प्रभार देकर कराया है। मेयर ने यह भी कहा कि ये वो ही लेखपाल है जो पहले भी मैनाठेर में सरकारी जमीन को ठिकाने लगा चुका है। सवाल यह उठता है कि जब मेयर को पता था तो क्या उन्होंने इस लेखपाल की शिकायत पहले शासन या मंडलायुक्त से की या फिर कोई और मामला था। बाहराल जमीन जायेगी या रहेगी ये तो पैमाइश पूरी होने पर ही तय होगा फिलहाल मेयर पूरे मामले में बाबा के बुलडोजर से तिलमिलाए नजर आ रहें हैं।
