नेशन एक्सप्रेस इंडिया,
मुरादाबाद। इस बार होली का पर्व पर्यावरण के अनुकूल मनाने की पहल की जा रही है। पेड़ों की कटाई रोकने और रासायनिक रंगों से दूरी बनाने के उद्देश्य से शहर के विभिन्न इलाकों में गोबर से बनी लकड़ियां और प्राकृतिक सामग्री से तैयार हर्बल गुलाल बनाया जा रहा है।
होलिका दहन के लिए गाय के गोबर से विशेष लकड़ियां और उपले तैयार किए जा रहे हैं। इनमें कपूर, चंदन, सुगंधित द्रव्य और फूलों की खुशबू मिलाई जा रही है, ताकि दहन के समय वातावरण शुद्ध रहे। गौशालाओं में बड़ी संख्या में गोबर के उपले बनाए जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य लकड़ी की खपत कम करना और गो-संरक्षण को बढ़ावा देना है। बताया जा रहा है कि इस बार हजारों की संख्या में गोबर के उपले तैयार किए जा रहे हैं।
वहीं, शहर के मझोला इलाके के मनोहरपुर स्थित कृषि प्रशिक्षण केंद्र में आरारोट से हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है। गुलाब, गेंदा, अपराजिता, हल्दी, दालचीनी के पत्ते, तेजपत्ता, चुकंदर और सिंदूर के पौधों से अलग-अलग रंग बनाए जा रहे हैं। गेरुआ और सिंदूरी रंग के लिए प्राकृतिक बीज और पत्तियों का उपयोग किया जा रहा है।

इन रंगों में किसी प्रकार के केमिकल का प्रयोग नहीं किया जा रहा है, जिससे यह बच्चों और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए सुरक्षित माने जा रहे हैं। केंद्र संचालक डॉक्टर दीपक मेहंदीरत्ता के अनुसार, हर्बल गुलाल की मांग लगातार बढ़ रही है।
कई शहरों से ऑनलाइन ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं और 800 किलोग्राम से अधिक गुलाल की बिक्री हो चुकी है। इसकी कीमत लगभग 250 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम बताई जा रही है।
