नेशन एक्सप्रेस इंडिया,
मुरादाबाद। फर्जी सदस्य बनाकर भूखंड व फ्लैट आवंटन के आरोपों में के गिरफ्त में आयी मायानगर आवास समिति के पदाधिकारियों की मुश्किलें और बढ़ती जा रही हैं। प्रयागराज हाई कोर्ट से समिति के उपसभापति डीपी सिंह को करारा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर राहत देने से साफ इन्कार कर दिया है। अदालत ने कहा है कि समिति के पदाधिकारी पहले सक्षम प्राधिकारी यानी आवास आयुक्त एवं निबंधक के समक्ष ही अपील करें। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद समिति की भंग की गई प्रबंध कमेटी पर कार्रवाई और तेज होने वाली है। कमेटी के प्रशासक व सचिव घपलों की परतें लगातार खोलने में लगे हुए हैं।
सहकारी विभाग की जांच में निकलकर सामने आया है कि समिति के पूर्व एवं वर्तमान पदाधिकारियों पर मूल आवंटियों के भूखंडों को फर्जी वसीयत, अनरजिस्टर्ड गिफ्ट डीड और फर्जी दस्तावेजों के जरिए गैर सदस्यों के नाम कराने के गंभीर आरोप हैं। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में पाया गया कि कई मामलों
में प्लाट की चौहद्दी बदलकर बाहरी लोगों को कब्जा दिलाया गया। जांच के दौरान 15 से अधिक भूखंड ऐसे चिह्नित किए गए, जहां मूल सदस्य होने के बावजूद अन्य लोगों के नाम रजिस्ट्री करा दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, समिति की जमीनों का नियमों के विरुद्ध विनिमय किया गया और कीमती भूमि छोड़कर अनुपयोगी जमीन ली गई। कई गाटा संख्या की भूमि जाली दस्तावेजों के आधार पर ट्रांसफर किए जाने से समिति को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा।
अधिकारियों ने प्राथमिक स्तर पर करीब 100 करोड़ रुपये तक की हानि पहुंचाने की आशंका जताई है। समिति के उपसभापति की ओर से दाखिल याचिका में कमेटी भंग किए जाने को चुनौती दी गई थी। हालांकि न्यायालय ने हस्तक्षेप से इन्कार करते हुए कहा कि वैधानिक अपील का मंच उपलब्ध है, इसलिए पहले संबंधित प्राधिकारी के समक्ष ही सुनवाई कराई जाए। बताया गया कि कई सदस्य वर्षों पहले भुगतान और रजिस्ट्री होने के बावजूद आज तकअपने भूखंड पर कब्जा नहीं पा सकें। वहीं समिति क्षेत्र में आवासीय भूखंडों का व्यवसायिक उपयोग भी जांच के दायरे में है। विशेष लेखा परीक्षा और निरीक्षण रिपोर्ट पर आगे आपराधिक कार्रवाई भी संभव है। मामले को जिले के बड़े सहकारी आवास घोटालों में माना जा रहा है और प्रभावित सदस्य अब सख्त
कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सिटी मजिस्ट्रेट एवं प्रशासक विनय पांडेय ने बताया कि हाईकोर्ट में उपसभापति डीपी सिंह की तरफ से याचिका दायर की गई थी। जिसमें समिति के भंग करने पर सवाल खड़ा किया गया था। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की बात सुनकर उपसभापति की याचिका
खारिज कर दी गई। समिति के पदाधिकारियों को अब आवास
आयुक्त के यहां अपील करने क लिए कहा गया है। आवास आयुक्त के पास समिति के पदाधिकारियों के पुख्ता और पर्याप्त सुबूत हैं।
