सब-हेड: मुरादाबाद में करोड़ों के विकास के दावे, हकीकत में सड़कें बदहाल, नगर निगम चैन की नींद सोया
नेशन एक्सप्रेस इंडिया संवाद,
मुरादाबाद। शहर में नगर निगम द्वारा विकास के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च करने के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। चाहें रामगंगा विहार पुलिस चौकी से वेबमॉल को जाने वाली सड़क हो वार्ड 39 में राजकीय इंटर कालेज से मुन्ना दूध डेरी को जाने वाली सड़क हो या शहर की कई मुख्य व अन्य सड़कें हो जगह-जगह गढ्ढे होकर क्षतिग्रस्त हो चुकी है। अब तो गड्ढों में तब्दील हुई सड़कों पर चलना जनता के लिए जान जोखिम में डालने जैसा है।
जनता का सवाल: जिम्मेदार कौन?
शहरवासी पूछ रहे हैं कि आखिर अच्छी सड़कों पर चलने का हमारा बुनियादी अधिकार छीन कौन रहा है? क्या इसके जिम्मेदार नगर आयुक्त हैं, महापौर हैं या फिर वार्ड पार्षद? टैक्स का पैसा आखिर जा कहां रहा है जब सड़कें ही चलने लायक नहीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर रोज दोपहिया वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर घायल हो रहे हैं। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का पैदल निकलना भी मुश्किल है। रात के अंधेरे में हालात और खतरनाक हो जाते हैं। वेबमॉल जैसा पाॅश एरिया भी टूटी सड़कों की मार झेल रहा है।
विकास के दावे बनाम जमीनी हकीकत
एक तरफ नगर निगम करोड़ों रुपए से विकास कराने का दावा करता है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि पुलिस चौकी जैसी अहम जगह को जोड़ने वाली सड़क महीनों से क्षतिग्रस्त पड़ी है। कई बार शिकायतों के बावजूद नगर निगम के अफसरों ने आंखें मूंद रखी हैं। ऐसा लगता है मानो पूरा निगम प्रशासन चैन की नींद सो रहा है।

रामगंगा विहार से अंकुश गोयल कहते हैं कि पहले स्मार्ट सिटी के नाम पर जनता ने परेशानी उठानी अब महीनों हो गए सड़क पर पत्थर ऐसे ही डाल रखा है आये दिन गाडियां पत्थर में फिसलकर गिरती है पर इस बात से न महापौर को और न नगर निगम को मतलब है।

वार्ड 39 चामुंडा मंदिर से राहगीर मो. आलम कहते हैं कि बहुत समय से कब्रिस्तान के सामने बीच सड़क पर गढ्ढा हो रहा है आये दिन गाडियां व ई-रिक्शा गढ्ढे में घुस जाती है पर इस पर किसी का कोई ध्यान नहीं है।
