नेशन एक्सप्रेस इंडिया,
मुरादाबाद। मुरादाबाद की सड़कों पर सुबह-शाम का मंजर किसी जंग से कम नहीं। हर चौराहे पर गाड़ियों की लंबी कतारें, हॉर्न का शोर, और लोगों के चेहरों पर बेबसी। वजह? शहर में लगी लगभग सारी ट्रैफिक रेड लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं।
सबसे बड़ा सवाल ये है – अगर ट्रैफिक कंट्रोल इन लाइटों से करना ही नहीं था, तो मुरादाबाद की आम जनता की गाढ़ी कमाई से वसूले गए टैक्स के लाखों-करोड़ों रुपए इन लाइटों पर व्यर्थ क्यों बहाए गए?
1. बंद पड़ी लाइटें, चालू है मुरादाबाद की परेशानी
मुरादाबाद के हर बड़े चौराहे का हाल एक जैसा है। पीली कोठी चौराहा, कंपनी बाग चौराहा, बुद्धि विहार तिराहा, रामगंगा विहार मोड़, कपूर कंपनी चौराहा, जिला अस्पताल तिराहा और दिल्ली रोड बायपास कट – हर जगह सिग्नल लगे तो हैं, पर चलते नहीं।
नतीजा ये है कि ट्रैफिक पुलिस वाले धूप-बारिश में सीटी बजाकर गाड़ियां निकलवा रहे हैं और जहां पुलिस नहीं, वहां “जिसकी लाठी उसकी भैंस” वाला नियम चल रहा है।
स्कूल बस लेट, एंबुलेंस पीली कोठी से जिला अस्पताल तक जाम में फंसी, ऑफिस जाने वाले रोज आधा घंटा एक्स्ट्रा लेकर निकल रहे हैं। पीतल नगरी की जनता का समय, पेट्रोल और सब्र – तीनों बर्बाद हो रहे हैं।
2. मुरादाबाद की जनता के पैसे का हिसाब कौन देगा?
एक ट्रैफिक सिग्नल लगाने का खर्च 8 से 15 लाख रुपए तक आता है। मुरादाबाद में अगर 20-25 चौराहों पर भी लाइटें लगी हैं तो सीधा-सीधा 2 से 3 करोड़ रुपया लगा। ये पैसा किसी नेता की जेब से नहीं, मुरादाबाद के दुकानदार, व्यापारी और नौकरीपेशा की जेब से टैक्स के रूप में वसूला गया है।
जब ये लाइटें चलनी ही नहीं थीं, तो इन्हें लगाया क्यों गया? क्या ये सिर्फ ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने और कागजों पर “स्मार्ट सिटी” दिखाने का प्रोजेक्ट था?
जवाबदेही किसकी है – नगर निगम मुरादाबाद की, ट्रैफिक पुलिस की या स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अफसरों की? आज तक किसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ये नहीं बताया कि लाइटें बंद क्यों हैं और जनता के पैसे की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है।
3. जाम से निजात कैसे मिलेगी? – मुरादाबाद के लिए 4 तुरंत उपाय
- लाइटें चालू करो या उखाड़ो: पीली कोठी, कंपनी बाग और दिल्ली रोड जैसे व्यस्त चौराहों की लाइटें 15 दिन में ठीक कराओ। ऑटोमैटिक के बजाय पीक आवर में मैनुअल मोड पर चलाओ।
- अस्थाई ट्रैफिक पुलिस: जब तक लाइटें ठीक नहीं होतीं, पीली कोठी, बुद्धि विहार तिराहा और कपूर कंपनी चौराहे पर सुबह 8-11 और शाम 5-8 बजे तक 2-2 ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात करो।
- अतिक्रमण हटाओ: 90% जाम की वजह कंपनी बाग से लेकर तहसील तक और पीली कोठी के 50 मीटर दायरे में खड़े ठेले, टेम्पो और अवैध पार्किंग है। इन्हें सख्ती से हटाओ तो आधी सड़क खाली हो जाएगी।
- एक्सपोर्ट का समय तय करो: मुरादाबाद पीतल नगरी है। भारी वाहन और लोडिंग टेम्पो के लिए शहर में नो-एंट्री का समय सख्ती से लागू करो ताकि *रामगंगा विहार, भूड़ो का चौराहा, गलशहीद और हनुमान मूर्ति जैसे इलाकों में दिन में जाम न लगे।
4. लाइटें कब एक्टिव होंगी? – मुरादाबाद पूछ रहा है सवाल
प्रशासन से सीधे सवाल हैं, जिनका जवाब मुरादाबाद नगर निगम और ट्रैफिक विभाग को देना चाहिए:
- शहर की कितनी लाइटें बंद हैं और पीली कोठी चौराहे का सिग्नल कब से बंद है?
- इन्हें ठीक कराने की डेडलाइन क्या है? तारीख बताओ, महीना नहीं।
- मेंटेनेंस का ठेका किस कंपनी के पास है और लाइट रिपेयर न होने पर पेनल्टी क्यों नहीं लग रही?
- टैक्स के पैसे की बर्बादी की जांच कौन करेगा?
ट्रैफिक लाइट कोई सजावट का सामान नहीं, मुरादाबाद की जनता की सुरक्षा और समय बचाने का सिस्टम है। अगर सिस्टम फेल है तो इसे लगाने वाले और चलाने वाले दोनों फेल हैं।
मुरादाबाद की जनता अब सिर्फ जाम में हॉर्न बजाकर अपना गुस्सा नहीं निकालेगी। उसे अपने टैक्स का हिसाब चाहिए और सड़क पर चलने का अधिकार चाहिए। प्रशासन को तय करना है कि उसे शहर “स्मार्ट सिटी” बनाना है या “जाम सिटी”।
क्योंकि लाल बत्ती बंद हो सकती है, पर पीतल नगरी की आवाज बंद नहीं होगी।

