संजय शर्मा,
नेशन एक्सप्रेस इंडिया,
मुरादाबाद। नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने सोमवार को उनके कैंप आफिस पर गो संरक्षण के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करने वाले प्रदर्शनकारियों पर अपने नगर निगम के कुछ कर्मचारियों का सहारा लेकर सिविल लाइन्स थाने में एफआईआर दर्ज करा दी है। नगर आयुक्त का ये पहला मामला नहीं है जब उन्होंने अपने निगम कर्मचारियों का सहारा लेकर जनता के लोगों पर या प्रदर्शन करने वालों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करायी है पहले भी वो काफी लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करा चुके हैं। आपको बताते हैं आखिर मामला क्या है सोमवार को शहर में गो-संरक्षण के मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय बजरंग दल ने पीली कोठी चौराहे पर प्रदर्शन किया था। प्रदेश अध्यक्ष रोहन सक्सेना के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने गोवंश की सुरक्षा, उपचार और संरक्षण को लेकर नगर आयुक्त कार्यालय पहुंचकर अपर नगर आयुक्त को मांग पत्र सौंपा था जिसमें उन्होंने कहा था कि वर्तमान व्यवस्था में कई खामियां हैं। इससे घायल और निराश्रित गोवंश को पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा था कि वर्तमान गोशालाओं में गंभीर रूप से घायल गोवंश को रखने मे असमर्थता जताई जाती है। उनके उपचार में कठिनाई होती है। ऐसे पशुओं के लिए अलग व्यवस्था किए जाने की मांग की थी। साथ ही प्रदर्शनकारियों ने कान्हा गोशाला में अव्यवस्थाओं का आरोप लगाते हुए कहा था कि वहां तैनात जिम्मेदार कर्मचारी गो रक्षकों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं और जरूरत पड़ने पर वाहन तक उपलब्ध नहीं कराया जाता। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को हटाकर संवेदनशील अधिकारियों की नियुक्ति की मांग की थी।

ऐसा लगता है कि कान्हा गोशाला पर ऊँगली उठाना नगर आयुक्त को नगवार गुजरा और उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर बिना अनुमति उनके आवास में घुसकर हंगामा करने और सरकारी काम बाधा उत्पन्न करने का आरोप लगाते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 191(2), 332(c), 221 की धाराओं में एफआईआर दर्ज करा दी है। नगर आयुक्त द्वारा कराई गयी इस एफआईआर को कुछ लोगों ने द्विवेषभावना से पूर्ण बताते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश में गोरक्षा और उनकी सेवा के लिए चिंतित हैं करोड़ों रुपए भेज रहे हैं। उनके सख्त आदेश भी हैं कि हर हाल में गो माता को अच्छी सुविधा मिलनी चाहिए आज हिंदुत्व की सरकार है। अगर कुछ खामियां दिखाई देने पर कान्हा गोशाला के खिलाफ आवाज उठा दी तो क्या गुनाह हो गया लोगों ने यह भी कहा कि यदि नगर आयुक्त ऐसे ही जनता के लोगों को अपने नगर निगम के कर्मचारियों का सहारा लेकर रिपोर्ट दर्ज कराते रहेंगे तो इससे सरकार की छवि खराब होगी और आने वाले समय में भाजपा को कौन वोट देगा। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि हर अधिकारी अपने आफिस में बैठते हैं परंतु नगर आयुक्त अपने टाउन हॉल आफिस में नहीं बैठते पहले की सरकारों में जितने नगर आयुक्त आये वो भी टाउन हॉल बैठकर जनता की समस्या सुनते थे।प्रकरण में नगर आयुक्त से बात करने की कोशिश की गई पर बात नहीं हो सकी।
