अभिषेक गौड़,
नेशन एक्सप्रेस इंडिया,
मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा विभाग में सुधार हेतु निरन्तर नए प्रयास ओर योजनाएं लागू करने में जुटी है। जिसमें डीबीटी, पाठ्य पुस्तक, डिजिटल लर्निंग, स्मार्ट क्लास, शिक्षक प्रशिक्षण के साथ ही अन्य सुविधाएं स्कूलों ओर बच्चों को दी जा रही हैं। इसके अलावा इन योजनाओं को सही प्रकार से क्रियान्वित कराए जाने के लिए जिले से लेकर ब्लॉक तक भारी भरकम बजट दिया जा रहा है। मगर इन सबके बावजूद भी जनपद मुरादाबाद में अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे हैं। पिछले दो सालों में जनपद की प्रगति का ग्राफ निरन्तर नीचे जा रहा है।

जहां एक तरफ हरदोई जैसे पिछड़े जिले सुधार करके आगे बढ़ रहे हैं वहीं मुरादाबाद पीछे होता जा रहा है। निपुण भारत मिशन में जनपद की रैंकिंग और छात्रों की संख्या में हो रही गिरावट इसके सीधे उदाहरण हैं
पिछले वर्ष हुए निपुण आकलन टेस्ट में जनपद मुरादाबाद प्रदेश में 33 वें नम्बर पर था जबकि इस वर्ष 63 नंबर पर पहुंच गया। इसके अलावा विगत कुछ वर्षों में मुरादाबाद के छात्रों की संख्या लगभग 50 हजार कम हो चुकी है। जो एक बड़ी चिंता का विषय होने के साथ ही मुरादाबाद की शिक्षा व्यवस्था और यहां के अधिकारियों की नेतृत्व क्षमता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है।
अब देखना यह है कि मुरादाबाद की स्थिति में कैसे सुधार हो सकता है। विगत 2024 से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विमलेश कुमार मुरादाबाद में तैनात हैं। इससे पहले यह मिड डे मील प्राधिकरण में उप निदेशक थे। और उससे पहले जनपद कुशीनगर में बीएसए रहते हुए शासन द्वारा निलंबित किए जा चुके हैं।

