संजय शर्मा,
नेशन एक्सप्रेस इंडिया,
मुरादाबाद। प्रथम नागरिक मेयर विनोद अग्रवाल ने धीमरी गांव में बाउंड्रीवाल गिराए जाने के बाद से प्रशासन के खिलाफ मोर्चा , खोल दिया है। मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह को पत्र लिखते हुए कहा कि बिना सुनवाई का अवसर दिये उनकी बाउंड्रीवाल गिरा दी गई जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि 15 दिन का नोटिस देना अनिवार्य है। पत्र में प्रशासन के साथ एसडीएम सदर डा. राम मोहन मीणा व धीमरी गांव के लेखपाल राकेश चौहान को प्रकरण से दूर रखने की बात कही। मेयर ने कहा है कि किसी दूसरे जनपद के उपजिलाधिकारी की टीम गठित कर नपाई कराई जाए, तभी निष्पक्षता प्रतीत होगी। मेयर ने लखनऊ में एसीएस होम संजय प्रसाद से भी मिलकर बिंदुवार पूरे घटनाक्रम की शिकायत की बात बतायी है।
बरेली-मुरादाबाद हाईवे स्थित पुराने टोल के पास धीमरी गांव में कंपोजिट विद्यालय निर्माण के लिए भूमि चिह्नित होने से इस हंगामे की शुरुआत हुई। गुरुवार को सदर तहसील की टीम ने पैमाइश के दौरान सरकारी नंबर में पड़ रही बाउंड्रीवाल को बुलडोजर से गिरा दिया।

जबकि मेयर ने बाउंड्रीवाल व जमीन खुद की बताते हुए विरोध दर्ज किया है । वहीं प्रशासन ने राजस्व अभिलेखों के अनुसार कहा कि भूमि सरकारी है। इस बात पर विनोद अग्रवाल अड़ गए उन्होंने जिलाधिकारी और मंडलायुक्त से शिकायत करते हुए निष्पक्ष पैमाइश कराने की बात रखी। मामले ने तूल पकड़ा तो शुक्रवार को जिलाधिकारी अनुज सिंह खुद एसडीएम संदर डा. राम मोहन मीणा, एसडीएम बिलारी विनय सिंह, दोनों तहसील व चकबंदी की टीम लेकर पहुंचे। सुबह छह बजे से लेकर रात आठ बजे तक 14 घंटे लगातार पैमाइश चलीं। डीएम के सामने मेयर ने कहा कि जिस भूमि को सरकारी बताकर बाउंड्रीवाल गिराई गई है, वह मेरी है। मैंने खरीदी है मेरे पास उसका दाखिल-खारिज है। उनकी भूमि गाटा संख्या 1086 में है। गाटा #संख्या 1086 में वह, अंजू रस्तोगी व भाजपा नेता श्रिषीपाल सिंह चौधरी के कास्तकार हैं। अंजू रस्तोगी ने कुछ दिन पहले ही अपने हिस्से की जमीन बेची है। मेयर ने कहा कि दस साल पहले उन्होंने चांद बाबू से यह भूमि खरीदी थी। इस गाटे में शेष र 0.2430 मीटर जमीन सरकारी है जिस पर एमडीए की ओर से सड़क बना दी गई है। जिसकी एनओसी भी जारी हो चुकी है। इससे सटे गाटा संख्या 1087 में सरकारी भूमि है।
आपको बता दें धीमरी के साथ उससे सटे उवीरपुर व सब्जीपुर गांव के संबंधित गाटा की भी पैमाइश हुई। पूरे दिन पैमाइश के बाद भी प्रशासन हल नहीं निकाल सका। और मेयर व सरकारी जमीन के बीच पैमाइश उलझी रही। शनिवार को फिर से सुबह छह बजे टीमें पहुंची। अब की बार रोवर मशीन से पैमाइश की गई। इस मशीन के बारे में कहा जाता है कि यह सौ प्रतिशत सत्यता के साथ डिजिटल नक्शा तैयार करती है। यह प्रक्रिया पारंपरिक ज़रीब (चेन) सर्वे की तुलना में बहुत तेज होती है। 11 बजे तक पैमाइश के बाद टीमें वापस लौट गयी।
पैमाइश के बाद क्या हल निकला, इस पर प्रशासन के अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहें हैं। यहां तक कि मेयर भी हल की जानकारी के लिए अड़ नज़र आ रहें हैं। देर रात कोई जानकारी न मिलने पर अब उन्होंने प्रशासन के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है और पत्र लिखकर दूसरे जिले के एसडीएम की टीम गठित कर पैमाइश की मांग कर दी। मशीन से पैमाइश होने के बाद भी प्रशासन की चुप्पी बहुत कुछ बयां कर रही है क्या हकीकत में जमीन सरकारी है मेयर के हाथ से जाती दिखाई दे रही है या फिर कुछ और बात है। ये तो आने वाला समय ही बतायेगा।
