निगम में नहीं रुक रहा टैंडर मेनेज कराकर सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाने का सिलसिला

नेशन एक्सप्रेस इंडिया,

मुरादाबाद। विभागीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि अब एक बार फिर नगर आयुक्त और महापौर टैंडर मेनेज कराने की तैयारी कर चुके हैं जबकि पहले टैंडर 25-30 प्रतिशत तक ब्लो डलवाये जा रहे थे आइए आपको ब्लो समझाते हैं यानी पहले कोई 10 लाख का टैंडर 7 लाख में मंजूर हो रहा था और काम संतोषजनक होने की भी रिपोर्ट लगाई जा रही थी परंतु अब 10 लाख का टैंडर प्रतिशत की जगह मात्र 30,40,60,70, पैसे डलवा कर 9 लाख 99 हजार 9 लाख 95 हजार में मंजूर हो रहे हैं ये खेल 50-60 ठेकेदारो के बीच चल रहा है उन्हीं के इर्दगिर्द टैंडर घुम रहे हैं अन्य और जो ठेकेदार 10 प्रतिशत या 15 प्रतिशत टैंडर ब्लो डाल देता है उसका टैंडर निरस्त कर दिया जाता है।

टैंडर मेनेज कराने के उद्देश्य से शासनादेश के बिना ही नगर आयुक्त साहब के द्वारा एन ए बी एल लैब का प्रमाण पत्र होने पर ही टैंडर डालने की शर्त लगा रखी है जबकि एन ए बी एल लैब का वह प्रमाण पत्र सभी ठेकेदारो को एक ही और वह फर्म जारी कर रही है जिसके बारे में जानकारी मिली है कि वह इसके लिए वैध ही नहीं है। जिसकी जांच होना आवश्यक है हाल ही में 25 करोड़ के निर्माण कार्य के लिए 322 टैंडर निकालकर मेनेज करा दिए गए जिससे 30 प्रतिशत ब्लो मानते हुए सरकार को 25 करोड़ पर पूरे 7 करोड़ 75 लाख का नुकसान पहुंचाया गया है जो कि शायद इस रुपए का अनुचित लाभ स्वयं ले लिया गया पीछले माह मुरादाबाद से भाजपा पार्षद एवं नगर निगम कार्यकारिणी सदस्य ने विडियो वायरल कर अधिकारियों द्वारा टैंडर मेनेज कराकर टैंडरों में भ्रष्टाचार करने के गंभीर आरोप लगाये थे। जिसकी खबर इंटरनेट से लेकर सभी समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुई थी जिस पर नगर आयुक्त और मेयर साहब द्वारा चुप्पी साध ली और सरकार को नुकसान व टैंडर मेनेज कराने वाली बात पर एक शब्द नहीं बोला ब्लकि उसके बाद भी नगर आयुक्त और मेयर द्वारा 322 टैंडर मेनेज करा दिए गए सूत्र बताते हैं कि नगर आयुक्त मुरादाबाद को या तो शासन स्तर से या और कहीं से टैडर मेनेज कराकर सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाने के लिए पूरा संरक्षण प्राप्त है इसलिए उन्होंने अब फिर 18 तारीख को टैंडर आमंत्रित करके पहले की तरह मेनेज कराने की तैयारी कर ली है। मुरादाबाद में कोई ठेकेदार टैंडर ब्लो डालने के लिए स्वतंत्र नहीं रहा जबकि शासनादेश है कि जिसका टैंडर कम रेट यानी 10 लाख का टैंडर जो ठेकेदार 7 लाख में करने के लिए रेट डालेगा उसका ही टैंडर मंजूर होगा परंतु यहाँ ऐसा नहीं हो रहा है। और इस भ्रष्टाचारी प्लानिंग के कारण सरकार की छवि धूमिल हो रही है 2027 का चुनाव भी आ रहा है।
अब देखना है कि टैंडर मेनेज कराने की यह प्रक्रिया खत्म होगी या फिर ऐसे ही सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया जाता रहेगा।

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