संजय शर्मा,
नेशन एक्सप्रेस इंडिया,
मुरादाबाद। साइबर ठगी के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला मुरादाबाद में बालाजी मंदिर के पास रहने वाले विवेक भटनागर नामक युवक का सामने आया है। उन्होंने जानकारी दी कि दिनांक 12 मार्च 2026 को एक आईपीएस ऑफिसर, जो मेरे परिचित थे, का मेरे पास फोन आया उन्होंने कहा कि मेरे एक मित्र CISF लखनऊ में है वह पूणे शिफ्ट हो रहे हैं , वह अपना हाउस होल्ड का कुछ समान बेचना चाहते हैं आप उनकी मदद कर दीजिए। मैं आपका नंबर उनको दे रहा हूं, विवेक भटनागर का कहना है कि 5 मिनट बाद दूसरे नंबर से उसके पास फोन आया और कहा गया कि आईपीएस सर ने आपका नंबर दिया है। आप मेरी सहायता कर दें मेरा कुछ हाउस होल्ड का सामान है जो 75,000 में बिकवा दीजिए। यह कहकर उसने कुछ हाउस होल्ड सामान, जिसकी कीमत लगभग तीन लाख की थी,फोटो मेरे व्हाट्सएप नंबर पर सेंड किया उसके बाद मेरा एड्रेस मांगा और कहा,मैं यह सामान ट्रांसपोर्ट से बुक कर रहा हूं। आज ही रात 9 बजे मेरी पूणें की फ्लाईट है, आप उसको उतरवा लीजिएगा। तीन आदमी उसके साथ आएंगे और आपके पास समान छोड़ जाएंगे।

इतनी बात हुई थी कि 5 मिनट के बाद ही विवेक के पास दोबारा फोन आ गया और कहा कि मैं बारकोड भेज रहा हूं आप 75,000 इस पर ट्रांसफर कर दीजिए क्योंकि ट्रांसपोर्ट वाला प्रोसेसिंग कोड मांग रहा है। इस बात पर विवेक को कुछ शक हुआ तो उसने कहा कि मैं एक घंटे बाद पैसा ट्रांसफर करूंगा। विवेक के अनुसार इस बीच उसने जिस नंबर से काल आयी वह और आईपीएस का नंबर गूगल आदि पर सर्च किया तो नंबर पर मुरादाबाद में एसपी सिटी रहे उनके परिचित आईपीएस अमित आंनद का नाम व फोटो आ रहा था। दोबारा फिर उसके पास आईपीएस का फोन आया और पूछा कि आपने पैसा ट्रांसफर कर दिया हो तो स्क्रीनशॉट मेरे को भेज दीजिए, तब विवेक कुछ देर के लिए चौंका और उसे शक भी हुआ ्उ्नसे कहा अभी नहीं किया है मेरे पास कैश है अकाउंट में पैसा नहीं है तो उन्होंने कहा आप किसी साइबर कैफे मे जाकर मेरे मित्र के गूगल पे पर जमा कर दीजिए। इस पूरे घटनाक्रम में विवेक के अनुसार वह उनके influence में था, कि मेरै परिचित आईपीएस ने फोन किया है, आवाज भी उन्ही की थी। मैने उनकी बात न मानी तो कहीं वह बुरा मानकर मेरे खिलाफ कोई action न लें लें, लेकिन मन में एक शक भी तो था। अब जब विवेक के पास CISF अधिकारी का फोन आया तो हिम्मत करके उसने कह ही दिया कि सर आपका खेल खत्म हो गया है। आप क्यों नहीं समझ रहे हैं कि मैने आपको पकड़ लिया है।
इतने पर भी उसने विवेक को प्रभाव में लेने की कोशिश की, जिस अब वह पक्का हो गया था। कि सामने वाला ठग है विवेक ने कह ही दिया कि क्यूं फ्राड करनें में इतनी मेहनत क्यों कर रहे हो यह सुन ठग ने फोन काट दिया।
अब विवेक भटनागर का कहना है कि वह सिविल लाइन्स साइबर क्राइम सेल में रिपोर्ट कराने गया था। परन्तु पुलिस का वही पुराना डर्रा रहा और कोई रिपोर्ट नही लिखी हाथ झाड़़ लिए। बाहरहाल इस मामले में पुलिस का रवैया ठीक नहीं रहा है।




